भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कहने पर 1956 में रक्षा विज्ञान प्रयोगशाला, दिल्ली में एक विकिरण प्रकोष्ठ की स्थापना की गई थी। इसे नामिकीय और व्यापक विनाश के अन्य हथियारों के प्रयोग से होने वाले परिणामों के संबंध में अध्ययन करने का प्रारंभिक कार्य सौंपा गया था। लेकिन जल्दी ही यह महसूस किया गया कि नामिकीय ऊर्जा मानव के कल्याण के लिए भी काम में लाई जा सकती है।  
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